कानपुर यूनिवर्सिटी का एक और गोरख धंधा
स्ववित्तपोषी कालेज एवं अंशकालिक के प्रवक्ताओ का जो की पहले ही शोषण के शिकार है परीक्षा पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के दौरान शिक्षक कल्याण के नाम पर ५ परसेंट पारिश्रमिक काट लिया जाता है और मजे की बात यह है की इनको वापस कभी भी किसी कैजुएलटी के बाद उस फंड से एक फूटी कौड़ी नही मिलती. विश्विद्यालय में ऊंची रसूख वाले टीचर्स और उनके पिछलग्गू रिश्तेदारों समेत टी डब्ल्यू ऍफ़ का पैसा मनमानी तरीके से खा जाते है.
कुलपति महोदय से अनुरोध है की इस सम्बन्ध में सार्थक कदम उठाये ताकि विश्वविद्यालय में न्याय पूर्ण प्रणाली दुरुस्त तरीके से कर कर सके.