Monday, 16 February 2015

valentine day ka darshan


वैलेंटाइन डे या १४ का दर्शन
इतना ज्यादा व्यस्त हूँ कि प्रेम की बात करने का मन तो नहीं है पर हर साल जितना प्रेम दिवस को लेकर हल्ला मचता है तो लगता है कुछ लोगो को तो जगा दूँ ( आप कहेंगे हम  सोये ही कब थे ) खैर इतना तो आपके जज्बे को मानना ही पड़ेगा कि आप खुल कर ये मानते है कि प्रेम को आप पनपने नही देंगे और जब पडोशी देश आपकी बात मान कर सिर्फ विष का वमन करता है तो आप प्रेम का सन्देश देते है | वैसे आज इस देश के लोग समझ गए होंगे कि जब इतना खुल कर आप प्रेम का विरोध करते है तो दबे पावँ क्या करते होंगे खैर जाने दीजिये मैं तो सिर्फ ये कहना चाहता था कि वललेन्तीने एक रोमन संत थे जो लोगो में प्रेम का प्रचार करते थे और इसी लिए उनको फांसी दी गयी थी और १४ फरवरी को वो पैदा हुए थे पर क्या आपने कभी सोचा १४ के बारे में !!!!!!!!!!!!!!!!!!! खैर आपको हिंदी में कुछ समझ में कहा आता है आप तो सिर्फ अंग्रेजी समझते है ना !!!!!!!!!!! तो लीजिये १४ यानि आई लव यही तो कहते है आप कोड में पर यहाँ १४३ यानि आई लव यू  पर वैलेंटाइन तो सिर्फ यही कहा आई लव ( १४) ये गलती किसकी है आपकी या किसी और की अब ये आप पर है की आप आई लव (१४) के साथ देश , माँ बहन , किसे जोड़ना चाहते है ????????? कुछ समझे १४ फ़रवरी का अटलब खैर आप व्यंग्य ही समझेंगे क्योकि सीधी बात आप ना कहते है ना सुनते है .........डॉ आलोक चांटिया ...अखिल भारतीय अधिकार संगठन

Thursday, 12 February 2015

२०१९ में पूरे भारत में होगी झाड़ू से सफाई

नरेंद्र मोदी चाहते है २०१९ तक पूरा देश हो स्वच्छ .........
जिसे देखिये वही कहते मिल जायेगा क्या दिया नरेंद्र जी ने ९ महीने में | पहले तो जाने लीजिये कि अभी नव महीने पूरे कहा हुए जब तक पूरे होने दिल्ली में अरविन्द ( कमल ) की किलकारी सुनाई देने लगेगी | और शायद कि कभी पैदा हुआ गोल मटोल बच्चा किसी को प्यारा न लगा हो जिसे देखिये वही गोद में उठाना चाहता है | यहाँ तक अगर वो आपके कपडे भी गंदे कर दे तो आप को कहा बुरा लगता है | तो हो जाइये तैयार दिल्ली में नरेंद्र मोदी जी के ९ महीने ( २६ फ़रवरी २०१५) का मजा | वैसे आपको मानने की आदत नहीं और आप किसीकी बात सुनते नहीं | शायद आपको याद नही कि नरन्द्र जी ने खुद कहा है कि २०१९ तक पूरे भारत को स्वच्छ कर दीजिये | अब फिर ये ना पूछियेगा कि सफाई होगी किससे????? झाडूं से और किससे और २०१९ में फिर से लोकसभा चुनाव है तो “आप “ जान गए होंगे कि नरेन्द्रजी २०१९ में क्या चाहते है ???? गाँधी की राह पर चलने वाले नरेंद्र जी अगर गाँधी की तरह ( गाँधी जी एक दीवान के लड़के थे और सुख सुविधा के लिए सक्षम थे ) कपडे से मोह नही छोड़ पा रहे तो क्यों हाय तौबा मची है | नरेंद्र जी को तो बचपन से सारी सुवधा नही मिली ना और अब जब ऐसा कर रहे है तो आप कहते है उन्होंने १० लाख का कोट क्यों पहना ???? क्या आप नहीं चाहते कि इस देश का गरीब कभी कीमती कोट पहने ?????? नरेन्द्रजी हमारे आदर्श होने चाहिए क्योकि उन्होंने वल्लभ पटेल की दुनिया की सबसे ऊची मूर्ति लगवाने जा रहे है और तो और उन्होंने गुजरात में उन्हें जो बट्टा मिलता था उसको भी उन्होंने सरकारी खजाने में दे दिया और चतुर्थ कर्मचारी के लाभ के लिए काम में लगाने को दिया | अब आप ये बात न कहियेगा कि पटेल जब उपप्रधानमंत्री बने तो उनको इतना भत्ता भी नही मिलता था कि उससे पाने परिवार का खर्चा चला पाते इसी लिए एक बार जब उनके घर की चाय पार्टी पर कुछ नेता ने उनकी बेटी की सिली हुई धोती देखकर कहा कि किसी उद्योगपति से कह दो साडी का ढेर लग जायेगा पर उनकी बेटी ने कहा कि मेरे पिता के आमदनी से इतना ही हो सकता है और मैं खुश हूँ | अब मोदी जी अगर इन सब बातो का ख्याल नही रखते तो ठीक ही तो है क्योंकांग्रेसियों की बढाई करें | क्यों करें ??? क्या ये कम है कि वो सबको लेकर चल रहे है क्योकि उनको संविधान के प्रस्तवना हम भारत के लोग का मतलब पता है और इसी लिए दिल्ली में अरविन्द( कमल ) का साथ दिया तो पूरे भारत से गाँधी और पटेल की बात कर रहे है लेकिन सबसे बड़ी बात ये है कि वो चाहते कि २०१९ में पूरे भारत में स्वच्छता के नाम पर झाडू लगे ( व्यंग्य है पर सच है आइये हम समझे ) नरेंद्र जी को इस देश का दर्शन समझना होगा ...डॉ आलोक चान्टिया, अखिल भारतीय अधिकार संगठन

Wednesday, 11 February 2015

भारतीय जनता .........पार्टी है पार्टी

भारतीय जनता!!!!!!!!!!!!!!!!!पार्टी है
अंग्रेज आकर इस देश से चले गए पर जाते जाते देश के संविधान में अनुच्छेद ३४९ का गिफ्ट दे गए जिसके हिसाब से जो शब्द अंग्रेजी के है और उनका प्रयाग ज्यादा होता हैतो उसको उसी रूप में हिंदुस्तानी भाषा के रूप में प्रयोग किया जा सकता है ....अब आईये पार्टी पर , आप सबका तो पता नहीं पर मुझे बचपन से यही पता है कि पार्टी का मतलब है किसी ख़ुशी को जाहिर करने के लिए मौज मस्ती ...........अब आज के बाद ये तो नहीं कहेंगे कि पार्टी का मतलब नहीं पता और आज जान गए ना कि देश में राजनीति करने वाले अपने संगठन को पार्टी का नाम क्यों देते है | समझे की नहीं हर राजनितिक संगठन चुनाव के समय क्यों इतने वादे करती है अब जब पार्टी है तो कह दिया मौज मस्ती में कि ये करेंगे वो करेंगे पर इसका मतलब ये थोड़ी ना कि मौज मस्ती में कही बात के लिए जान देंगे | तो आज के बाद किसी से ना कहियेगा कि फ्ला पार्टी ने अपना वादा पूरा नहीं नहीं किया | तो अब बताइये कि आप क्यों कहते है कि देश में सरकार बनाने के बाद वो कुछ नहीं हुआ जो कहा गया था | क्यों करे ????????? अरे भारतीय जनता !!!!!!!!!!!!!!!!!!!!! पार्टी है ये बस मौज मस्ती कीजिये देश जाये तेल लेने अपना काम निकालने के लिए कह दिया होगा कि ये करेंगे वो करेंगे पर इस देश में तो विद्वान रहते है क्या वो इतना नहीं समझते ????? तो लीजिये एक बार फिर कहते है भारतीय जनता .....................पार्टी पार्टी है समझे कि नहीं ( व्यंग्य समझ कर शब्द के असली अर्थ को समझे ) डॉ आलोक चान्टिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन


Tuesday, 10 February 2015

बलि बेदी ..........या ........किरन बेदी

बलि ....बेदी यानि किरण बेदी
अब आप ना माने तो मैं क्या करूँ आप स्वतंत्र भारत में रहते है और किसी की क्या मजाल जो आपको मजबूर करे कोई बात मनवाने की पर इस देश को बहुत समय बाद एक बेहतरीन नेता मोदी के रूप में मिला जिको पता है कि शब्द कोष में बेदी का मतलब क्या होता है क्योकि दिल्ली में झाडूं के साथ कोई किरन तो दिखाई नहीं देती अब भला आप ही बताइये झाड़ू कब लगती है ???????? अरे बही सुबह सुबह और जब झाड़ू लगती है तो पूरब से निकलते सूरज से आपके आँगन में क्या आती है किरन !!!!!!!!!!!!!!!है कि नहीं तो झाड़ू को कौन समझ सकता था ??????????? किरन ना !!!!!!!!!! तो क्या बुरा किया चुनाव की बेदी पर झाड़ू के सामना करने के लिए किरन को सामने करके  !!!!!!!! आखिर जो देश के लिए सोचते है वो अपनी बलि देने से कब पीछे हटते है और देश के तो अब तो समझ गए ना की देश के लिए ही सोचने वाले नरेंद्र जी ने क्यों बलि .....बेदी के लिए किरन ....बेदी को चुना !!!!!!!!!!!! मैं नरेंद्र जी का कठोर समर्थक हूँ कि वो शतरंज कि बिसात को चलना जानते है काश कभी मैं भी चेक मेट करता .....देखिये देखिये वो वो कृष्णा नगर में बलि बेदी पर किरन बेदी चढ़ गयी क्या आपको सुबह झाड़ू के साथ किरन देखने का अब भी मौका मिलता है ( शहर में अब घरों में उची बिल्डिंग के सामने जाहदु लगने पर कभी घर के आँगन में किरन नहीं आती ) व्यंग्य के इस सच से आप सहमत है ????? डॉ आलोक चांटिया

क्या दिल्ली ने स्वच्छता का सही अर्थ समझा

दिल्ली ने नरेंद्र मोदी के स्वच्छता अभियान पर किया भरोसा .......
हे भगवन क्या होगा इस देश का ....सुबह से ही हर चैनल बस चिल्ला रहा है कि नरेन्द्र मोदी हर गए बी जे पी कीखुल गयी पोल ............कहा खुली पोल नरेंद्र  जी ने पिछले ९ महीने  में यही तो कहा कि सबसे पहले हमको स्वच्छ करना होगा देश को और उसके लिए सबसे पहले आदमी जहा रहता है वही से तो शुरवात करता है और वो तो हमारे आदर्श है इसी लिए उन्होंने दिल्ली से कर दी शुरवात .और सफाई होती किस्से है .........अब ये ना कहियेगा कि आपको नहीं पता कि झाड़ू और ना जाने कितनी बार नरेंद्र जी ने झाड़ू हाथ में पकड़ कर यही सन्देश दिया कि पहले झाड़ू पर विश्वास करो और लीजिये देश का दिल यानि दिल्ली ने नरेंद्र जी की बात दिल से लगा ली और आप कह रहे है कि नरेंद्र जी की ये हार है एकबार फिर सोचियेगा सवचछता में छिपे सन्देश को .......दिल्ली से सफाई अभियान के लिए दे तो दीजिये बधाई ...ना दीजिये मेरी बला से मैं तो नरेंद्र मोदी का हूँ और उन्ही का ही रहूंगा ( व्यंग्य की सच्चाई समझ कर पढ़िए ) डॉ आलोक चांटिया

Monday, 9 February 2015

और ......त

और ........................त
और क्या अब मुझसे क्यों पूछ रहे है ये तो पूरा देश जनता है कि त से तमाशा | अब मानिये ना मानिये रोज इस देश के घर बाहर सड़क  चौराहे पर कोई मदारी सब से सामने खड़ा होता है , वो जो चाहता है कहता है , हँसता है , नाचने वाले को नचाता है , ताली बजती है , सीटी बजती है पर आप तो केवल तमाशबीन  है आपसे क्या मतलब कौन किसके साथ क्या कर रहा है आपको तो बस देख कर सुन कर मजा लेना है और सबके समाने मदारी कहता है ....................और .(त )  माशा शुरू ............पर आप तो शार्ट फॉर्म में जीते है तो लीजिये अब आपको ज्यादा समझ में आएगा .....और ...................त ( व्यंग्य कीहकीकत समझ कर देखिये की आज मदारी कौन है और हम किसको गली चौराहे पर नचा रहे है शायद आपको चौराहे पर मदारी के सिकंजे बंधे किसी की पुकार सुनाई पद जाये ) महिला के लिए बोलना शुरू कीजिये .......... डॉ आलोक चान्टिया अखिल भारतीय अधिकार संगठन

Sunday, 8 February 2015

गौरी जिन्दा तो हो

महिला जिन्दा तो हो ...........
गौरी यानि पार्वती यानि उमा ने शिव को पाने के लिए ३७ हज़ार साल तपस्या की ( मुझे नहीं मालूम इतनी आयु के बारे में राम चरित मानस में लिखा है ) तब जाकर उनको भगवान शंकर के रूप में इस देश में एक इच्छा के अनुरूप व्यक्ति जीवन  साथ के रूप में मिला ......पर हम आप तो जगल और हिमालय पर रहने वाली गौरी से इतर शहर में रहने वाली गौरी का शरीर १९ साल में काट डाल रहे है तो आज की गौरियां कैसे तप करें कि उनको शिव सा व्यक्ति सामने दिखाई दे क्योकि अपनी छोटी सी तपस्या से जिसका भी वरन आज कि गौरी कर रही है वो तो कुटिया में ऋषि वेश बदल के आये रावण की तरह मिल रहा है | मैं जनता हूँ कि आप में से ना जाने कितने मेरी इस बात का विरोध करेंगे कि क्या लड़की सिर्फ शादी के निमित्त ही बनी है !!!!!!!!!!! न न न न मैं भी ये नही कह रहा है पर गौरी की तरह निर्विघ्न तपस्या भी तो आज की गौरी नहीं कर पा रही है | अगर गौरी घर से पढ़ने निकली तो मार दी जाती है | अगर लाँड्री जाती है तो मार दी जाती है |और अगर वो प्रेम जैसे शब्द को जीने लगे तो मार दी जाती है | अगर शादी हो जाये तो मार दी जाती है तो फिर आप भी मान लीजिये ना कि आज की गौरी की तपस्या शायद मौत पर ही खत्म हो रही है क्योकि आप कहेंगे कि औरत उपभोग की वस्तु तो है नहीं अब इतना कुछ करके भी आपको गौरी एक वस्तु से ज्यादा कुछ लगी | ओह हो आप तो रोज शाम को मोमबत्त्ती जला कर उसे ढूंढने निकलते है पर वो नही मिल रही है तो क्या हुआ आप तो संतोषम परम सुखम को जीते है मोमबत्ती की रौशनी में रोज कोई और गौरी मरी , बलात्कार की हुई मिल जाती है तो आपको तो रोज मुद्दा मिल रहा है ना वैसे जिस गौरी के लिए आप लड़ रहे है क्या उसको अमृत पिला का जिन्दा किया जा सकता है ?????? नहीं तो किसी जिन्दा गौरी के चारों और तब तक खड़े हो जाइये जब तक वो उस शिव के पास न पहुंच जाये जिसके लिए तस्य करने वो इस दुनिया में आई है | क्या आपको शिव मिले कभी ??? गौरी की नासमझी को क्या कहे ????( व्यंग्य के अंदर के भाव को समझिए सही ही सत्य है और सत्य ही सुन्दर है ) डॉ आलोक चांटिया , अखिल भारीतय अधिकार संगठन