Tuesday, 2 September 2014

सोचो

जाने के आसरे बैठे क्यों हो ,
क्यों आये हो ये भी सोचो ,
क्या दिया है इस दुनिया को ,
कभी तन्हाई में ये भी सोचो ,
जिसको करके तुम खुश हुए ,
ये सब तो है कौन न करता ,
मानव होकर दिया क्या तुमने,
मुट्ठी में है रेत तो सोचो ,
अगर नहीं कोई फर्क चौपाये से ,
दो हाथ मिले क्यों सोचो ,
जी लो एक बार उसके खातिर ,
भगवन को एक बार तो सोचो ,
कितना दीन हीन हुआ वो है ,
उसकी बेबसी को भी तो सोचो ,
क्या कहे अब सब मिटा कर ,
मानव कैसे ले अवतार वो सोचो .........
ऊपर वाला क्या खुश है मानव को बना कर


Monday, 1 September 2014

तीसरा विश्व युद्ध ..............मान भी लीजिये

तीसरा विश्व युद्ध पहचान और धर्म के आधार पर चल रहा है पर आप क्यों मानने लगे क्योकि आप तो एच आई वी को भी फर्जी बात मानते है और जब तक अमेरिका , फ्रांस , जर्मनी , रूस जैसे देश खिल कर सामने आ आये तो भला विश्व युद्ध कैसे और आप तो हमेशा से ही इस बात के हिमायती रहे है कि जब तक आप के घर पानी है लड़की सुरक्षित है तो देश में सिर्फ फर्जी बात हो रही है | अब सामाजिक विज्ञानं में यह तो कहा ही जा सकता है कि जब विश्व के करीब आधे देश लड़ रहे है और रोज 5000 से ज्यादा लोग मारे जा रहे है तो कब आप इसको विश्व युद्ध मानेंगे | वैसे आप शायद भूल रहे है कि सिर्फ १३ और १५ % पाने वाले को आप संसद सदस्य घोषित कर देते है तो क्यों नहीं मान लेते अगर विश्व की २०% जनसँख्या युद्ध से पीड़ित है तो विश्व युद्ध है | वैसे आप ने ही तो कहा है कि वसुधैव कुटुंबकम को यानि पूरी पृथ्वी आपके परिवार के सामान है तो परिवार के लोग मारे जा रहे है और आप कहते है कि आप सुखी है और कहे भी क्यों ना आखिर आपकी कथनी करनी में अंतर कहा है ? और हां आप को याद तो है ना कि कभी ये पूरी पृथ्वी एक साथ जुडी थी तब इसे पैंजिया कहते थे बाद में टूट कर इतने महादीप और देश बन गए तो क्या ये सब आपके भाई बहन नहीं !!!!!!! अच्छा तो आप क्या बटवारें के बाद अपने भाई को भाई नहीं मानते ??? अगर आपको मेरी बात नहीं समझ में नहीं आ रही तो विज्ञानं की भाषा में समझ लीजिये यानि डी एन ए के शब्दों में पुरे विश्व की महिला को अनुवांशिक पथार्थ सम्मान है यानि दुनिया एक ही महिला से उत्पन्न है और आज एक ही माँ के बच्चे लड़ रहे है तो क्या यही मानवता का सार है अगर नहीं तो मान लीजिये ना कि पूरी दुनिया में आभासी तीसरा विश्व युद्ध चल रहा है और आप बच नहीं सकते ? संभालिएगा जगल की आग से अक्सर बेकसूर भी जल जाते है | ( एक सच व्यंग्य के रूप में )

कितनी बेबस मैं

क्या कहूँ क्या जीवन मेरा ,
मौत से बेहतर से क्या जानूँ,
छोड़ गए जो मुझे अकेला ,
उनको मानव मैं क्यों मानूं ,
जो कहते थे लोग सभी ,
सुख के सब साथी होते है ,
वही अक्सर  बाजार में खड़े ,
मेरे सुख के खरीददार होते है ,
मुझे कोई फर्क नहीं अँधेरे का ,
सपने तभी सुन्दर आते है ,
कोई ताज महल तामीर होता ,
जब आलोक से दूर जाते है ,
मेरे गरीबी के जलते दीपक ,
तुमको दीपावली ख़ुशी देंगे ,
मेरे फटे हाल कपडे के सपने ,
उचे लोग फैशन में लेंगे  ,
फिर छूट रही है ऊँगली ,
मुट्ठी में रेत की तरह आज ,
सिलवटें, मसले हुए फूल ,
ना जानेंगे  रात का राज  ,
अब अँधेरा तो बहुत है ,
रिश्तो के दायरों में लेकिन ,
पर एक रिश्ता फिर उभरा ,
मेरी बर्बादी से तेरा मुमकिन ...........
पता नहीं क्या लिखता रहा कभी समझ में आये तो मुझे समजाहिएगा जरूर क्योकि आज आदमी से ज्यादा बर्बादी का खेल कोई नहीं खेल रहा एक पागल कुत्ता भी नहीं एक जहरीला सांप भी नहीं .......

Sunday, 31 August 2014

जन धन योजना - दरिद्र नारायण का अवतार

जन धन योजना - दरिद्र नारायण है देश में
कुछ भी लिखने से पहले बता दूँ कि मैं नरेंद्र मोदी को एक निर्माता के रूप में देखता हूँ पर बेबाक खाने से चूकना नहीं चाहिए क्योकि मैं एक दरिद्र नारायण हूँ ?? नहीं समझ ना अरे भाई मैं इस देश का प्रजातान्त्रिक नागरिक हूँ यानि जिस नागरिक की मदद से सरकार बनती है लेकिन हल्ला होता है कि किन धन कुबेरों ने देश में सरकार बनवायी और तो और अब देश की विकास दर को ऊचा ले जाना है तो  धन कुबेरों से ये होने से रहा हा वो बात और है कि इन धनकुबरों के लिए इस देश में पुरूस्कार बहुत है | अब देखिये कैसे इस देश को दरिद्र नारायण बढ़ाने जा रहे है | सरकार ने एक योजना शुरू कि है जन धन योजना जिसमे उन लोगो के बैंक खाते खोले जायेंगे जिनके खाते है ही नहीं | करीब १५ करोड़ खाते खोले जायेंगे | खाते खोलने वालो का बीमा वो भी एक लाखका हो जायेगा यानि सरकार ने मान लिया कि मरते सबसे ज्यादा यही दरिद्र नारायण ही है और हम तो तेरहवीं पर भी खाने के लिए चले जाते है तो भला एक लाख का बीमा सुन कर क्यों न खाता खुलवाओ | यानि जो पैसा गरीबो का सरकार तक नहीं पहुंच पाता था अब आसानी से पहुंचेगा | और ख़ुशी की बात ये कि अगर छह महीने तक आपका कहता ठीक से चलता रहा !!!!!!!!! यानि आप उसमे पैसा डालते रहे तो आप को पांच हज़ार का ओवर ड्राफ्ट आप करा सकते है | केवल साल में एक बार होली के रंग खेलने के बाद के बेकार कपडे में खुश हो जाने वाले दरिद्र नारायण के लिए ये किसी करोड़पति से कम होने कि बात नहीं है पर इस से प्रजातान्त्रिक देश के पास छह महीने तक उन गरीबों का भी पैसा पहुचने लगेगा जो आज तक नहीं पहुंच पाता था तो अच्छे दिन तो आएंगे ही ना !!!!!!!!!! मरे पास न घर नही ना गाड़ी है पर आप से बता नहीं सकता कितना खुश होता हूँ जब ये पता चलता है पासबुक में कितना पैसा है तो कम से कम बेघर , अभावग्रस्त लोगो के लिए देश में ख़ुशी की एक लहर तो आई | इसकी चिंता ना करियेगा अगर आपको सरकार देश के निर्माण का अवार्ड ना दे भाई वो तो टाटा बिरला रिलायंस के लिए ही ना है | आप तो प्रजातंत्र की नीवं है बस इस देश को मजबूत बनाते रहिये | क्या गांव से शहर में आये हो रिक्शा चलाने के लिए और उसी पर सो जाते हो , शौचालय सड़क के किनारे जाते हो तो क्यों नहीं बैंक में खाता खुलवाया ??खुलवाओ भैया खुलवाओ आखिर देश का निर्माण तो तुमको ही करना है आखिर  इस देश में ही तो दरिद्र नारायण की कल्पना है | मैं तो चला खाता खुलवाने ( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

love jehaad

लव जेहाद ................
लव एक अंग्रेजी भाषा का शब्द है और जेहाद एक अरबी भाषा का शब्द है तो ये तो आप वैसे ही समझ गए होंगे कि इसका भारत से कोई लेना देना नहीं तो फिर आज कल जो चल रहा है वो क्या है ? दो अलग भाषा से बना एक संकर शब्द इसी संकर ( हाइब्रिड )शब्द को लेकर पूरी दुनिया के कई देश यह नहीं जान पा रहे है कि भारत में रहने वाले को क्या कहा जाये ? अब हमने तो हिंदुस्तान शब्द की रचना की नहीं अरे मेरा कहने का मतलब है की हमारे हिंदी भाषी पूर्वजो ने तो किया नहीं यानि जो लोग इस देश में बाहर से आये उनको कहना पड़ा की ये देश हिन्दुओ का है | और ये बात तब और पक्की हो गयी जब १९४० में पहली बार रहमत अली जी ने पाक शब्द की रचना की और जो १९४७ में मुकम्मल देश बन गया | अब ये तो हम सब बचपन से पढ़ते आये है २ में से एक घटाओ तो क्या बचेगा तो १९४७ के बाद जो इस देश में पाक के बनने के बाद बचा उस पर आज इतनी हाय तौबा क्यों है समझ में नहीं आता !! वैसे ये देश जिन लोगो के कारण जगत गुरु कहलाया वो कौन थे ? मुझे मालूम है कि आप भी हिंदुस्तान कहेंगे | अब अगर कोई भी हिंदुस्तान में रह कर किसी से भी शादी करता है तो क्या ये जानने या बताने की जरूरत है कि वो लड़का या लड़की इस देश में क्या होगा | अब हिन्दू के अस्तान पर आने वाले ये समझते है कि जोधा शादी के बाद मूर्ति की पूजा करना छोड़ देगी तो उनका सोचना गलत है | लव भी जेहाद हो सकता है काम से काम आप ये तो जान गए | वैसे जेहाद का मतलब आपको पता है ना !!!!!! खैर प्यार , प्रेम , मोह्हबत , सब लिखने में ही अधूरे है तो इनकी मदद से शुरू की गयी कोई भी जेहादी जंग अधूरी ही रह जाएगी | अब भाई हम लोग क्या कर सकते है अगर आपको जंग के बाद के कैदी की तरह sar कटाने का ही शौक है | काश शिवा जी को इस प्यार के बारे में पता होता तो वो गौहर बनो को बेटी कह कर वापस क्यों करते | कम से कम हिन्दू के अस्तान में कुछ प्यार के संकर गीत ही लिख जाते | वैसे इस देश में आने वाले हर आक्रमणकारी के साथ कितनी औरतें आई थी !!!!! क्या आप बताएँगे मुझे | तो क्या वो लव जेहाद नहीं था ????????????माफ़ कीजियेगा शायद मैं ज्यादा बोल गया ( इसे सिर्फ व्यंग्य समझ कर पढ़े )

Friday, 29 August 2014

गणेश चतुर्थी और अनुवांशिकता

गणेश चतुर्थी ........एक औरत की शक्ति
वैसे तो अनुवांशिकता के सिद्धांतों और खोजो से यह सिद्ध हो चुका है कि एक औरत को पुरुष की कोई आवश्यकता नहीं है अगर वो माँ बनना चाहे क्योकि एक लड़की से लड़की का जन्म हो सकता है पर ये नारी की महानता है की वो सिर्फ अपने लिए नहीं सोचती और इस दुनिया में पुरुष का अस्तित्व बनाये रखने के लिए वो उसके साथ रहना स्वीकार कर लेती है और आपको पता है कि पार्वती जी ने अपने नहाने के चन्दन से एक पुत्र को जन्म दिया और फिर तो आप जानते है कि कैसे शंकर जी ने उसका सर काट डाला , और वही से अनुवांशिकता का दूसरा अध्याय शुरू हुआ , पार्वती  जी के कहने पर भगवान ने एक संकर दिव्य पुरुष को हाथी के बच्चे के सर को काट कर बनाया जिसे हम गणेश जी के नाम से जानते है और वो दिन चतुर्थी का ही था इस लिए आज के दिनको गणेश के जन्मदिन के रूप में मनाया जाने लगा , क्षत्रपति शिवा जी , पेशवा , बल गंगाधर तिलक से लेकर आज के प्रतंत्रिक युग में गणेश का जन्मदिन तो मनाया जा रहाहै पर गमेश के जन्म और पुनर्जन्म को ना जाने क्यों हम विश्व अनुवांशिक दिवस के रूप में नहीं मना पाते ......खैर आप सभी को गणेश चतुर्थी यानि विश्व अनुवांशिक दिवस की शुभ कामना .गणपति मोरया ................वैसे जाते जाते आपको बता दूँ कि अगमेश जी की दोनों पत्नियों का नाम रिद्धि और सिद्धि है और उनके दोनों पुत्रों का नाम शुभ और लाभ है .....अब समझ गए ना की क्यों दीवारों पर शुभ लाभ लिखा जाता है ....तो कहिये न गणपति बाप्पा मोरया ...........

Thursday, 28 August 2014

मैं और समय

अब मैं पौधा ,
नहीं रहा हूँ ,
अब मुझे जब ,
जहा चाहे उठाना ,
बैठना आसान ,
नहीं रहा है ,
अब मैं दरख्त ,
बन गया हूँ ,
जो छाया दे ,
सकता है , ईंधन ,
भी दे सकता है ,
मुझ पर न जाने ,
कितने आशियाने ,
बन गए है ,
पर अब मैं हिल ,
नहीं सकता ,
मैं किसी से खुद ,
मिल नहीं सकता ,
ठंडी हवा देकर ,
सुकून दे सकता हूँ, ,
आपके लिए जल ,
भी सकता हूँ ,
सब कुछ अच्छा कर,
मैं कुल्हाड़ी से ,
कभी कभी आरे से ,
कट भी सकता हूँ ,
खुद को बर्बाद कर,
आपके घर की ,
चौखट बन सकता हूँ ,
कितना बेबस आलोक ,
दरख्त बन कर भी ,
लोग टहनी ले जाते ,
क्या मिला जी कर भी ..............
जीवन में समय की कीमत को समझिए क्योकि वही आपके जीवन में दोबारा नहीं आता है ...