Saturday, 16 August 2014

क्या ये सच नहीं है

क्या सच ये नहीं ?????
भारत गावों का देश है और यहाँ ज्यादातर गांव वाले ही रहते है |
मैं आपसे या आपके लिए नहीं कह रहा हूँ मैं जनता हूँ कि आप शहर में रहते है |
शहर में कूड़े से जमीन को पाट कर मकान बनाये जाते है |
कहते है जैसी नीव होती है वैसे ही ईमारत बनती है | कूड़े के ऊपर बने मकान में मनुष्य रहता है |
कूड़े में सूअर लोटते है | आज कल सूअर का पालन करके लोगो अमीर बन रहे है |
कल एक अमीर ने अपनी बीवी को मार डाला |
कुछ ने अमीर बनने के लिए कुछ देवी को बेच डाला |
अब उन देवियों कि पूजा करने पूरे तन मन से रोज मनुष्य आते है | शायद देवता की स्थापना के लिए ऐसा होना जरुरी है |
क्या अब भी नहीं लगता की कि पृथ्वी पर मनुष्य से ज्यादा सुन्दरतम प्राणी कोई नहीं !!! आज फिर शहर में एक मैदान कूड़े से पाटा  जा रहा है ( इसे व्यंग्य न समझे व्यंग्य की तरह पढ़े )

Friday, 15 August 2014

झूम बराबर झूम शराबी

झूम बराबर झूम ,,,,स्वतंत्रता दिवस है भाई
क्या बात है जिसे देखिये वही देश की स्वतंत्रता की बधाई देने के लिए पागल हुआ जा रहा है पर आज भगत सिंह के घर कोई बधाई देने नहीं गया ? कोई भी सुभाष चन्द्र बोसे के घर वालो को इस दिन की बधाई देने गया और बधाई मिली तो किस को जिन्होंने कुछ किया ही नहीं पर जैसा मैंने पहले कहा कि भला इसमें इनकी क्या गलती ये तो आजादी के जश्न में झूम रहे है और हमारे देश में झूमते कौन है ?????????? शराबी !!! हा हा चलिए आपको वो गण तो याद रहा झूम बराबर झूम शराबी .काली घटा है मस्त हवा है झूम झूम .क्या अब जानने की जरूरत है है की कोई क्यों नहीं भगत सिंह के घर गया |
वैसे मुझको भी झूम से याद आया झूम की खेती ...जी जी भारत एक कृषि प्रधान देश है और यहाँ पर झूम की खेती होती है देश की करीब ७०० जनजातियों में से करीब ८० जनजातियां इस खेती को करती है | अब शराबी की तरह चिल्लाने के बजाये सुनिए क्या होता है इस खेती में !! इसमें बड़े बड़े जंगल के पेड़ों को जनजाति के लोग काट डालते है फिर उसमे आग लगा देते है , जलने के बाद जो रख बचती है उसमे वो लोग बीज बोते है और उसी उपज को कहते है क्या आपको पता है इसके पीछे उनका दर्शन क्या है ? वो मानते है की अगर धरती पर हल चलाया गया तो घरती को दर्द होगा और वे उसको दर्द नहीं देना चाहते है इस लिए झूम खेती होती है | और आप भी आज झूम रहे है तो क्या मैं मान लूँ  कि आप भी अपने कृत्यों से इस देश यानि अम्मा यानि धरती को कष्ट नहीं देना चाहते ? मतलब कल से चोरी , डकैती, बलात्कार , अपहरण , दहेज़ हत्या , यौन उत्पीड़न या भ्रष्टाचार बंद !!!!!!!!!!! अगर नहीं तो आज आपके झूमने का मतलब !!!!!!! काम से काम आइये थोड़ी झूम की खेती ही कर डालिये, शायद आपकी यही झूम से स्वंत्रता में कुछ सच्चा झूम आ जाये , माफ़ कीजियेगा अगर आपको कुछ गलत लगा हो क्योकि आपको सच सुनने की आदत नहीं और सच नीम सा कड़वा होता है पर आपको कड़वे पन से इतनी नफरत है कि दुनिया के सबसे ज्यादा मधुमेह के मरीज यही है तो चलिए आपके देश में रहना है तो हुआ हुआ कहना है .आप सब को स्वंत्रता दिवस की झूम .........( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

Thursday, 14 August 2014

यही तो है स्वतंत्रता दिवस !!!!

संतोषम परम सुखम ..स्वतंत्रता दिवस मुबारक हो
भाई अपने देश में इतनी जनसँख्या इसी लिए हो गयी क्योकि यहाँ संतोष ही संतोष है गरीब सोचता है कि उनके नसीब में गरीबी हो लिखी थी और अमीर सोचता है कि वो क्या कर सकता है जब भगवान ने ही इनको गरीब बनाया तो बच्रे क्या कर सकते है उनके लिए ? खैर स्वतंत्रता दिवस तो इनके लिए भी है वो बात अलग है की सड़क पर दौड़ती गाड़ियों  के धुएं और धूल भी स्वतंत्रता के बात इनके हिस्से में आई | मैं जनता हूँ आप कहेंगे की कम से कम
इनको ये तो मालूम हो जाता है दम घुटना किसे कहते है और बिना पैसे के आपदा प्रबंधन के बारे में सीख लेते है | और वैसे भी रुखा सुख खाए के ठंडा पानी पीयू..देख परायी चुपड़ी मत ललचावे जीव ........यही क्या कम है कि इनको स्वंत्रता सांस लेने का मौका तो मिल रहा है वरना इराक में होते तो जान भी ना पाते कि कल होगी कि नहीं ! छोड़िये नहीं तो आपको लगेगा कि मुझे स्वतंत्रता दिवस मनाना ही नहीं आता और मैं भला ऐसा मौका क्यों छोड़ू ? आखिर जब घर घर में भाई भाई में बटवारा हो जाता है तो अगर देश बाँट कर स्वतंत्रता मिली तो कौन सी हाय तौबा हो गयी पर एक बात मैं आज जाकर समझ पाया कि हम ये क्यों कहते है कि हिन्दू मुस्लिम सिख ईसाई .आपस में सब भाई भाई | अब बटवारा तो भाई भाई में ही होता है | और जो बटवारा हुआ था वो १९४७ वाले भाइयों के बीच हुआ था अब बीसवीं सदी वाले भाई भी तो बटवारा चाहते है और चाहे भी क्यों न आखिर जीवन जीने का अधिकार सभी को है और ये तो हमारे यह मूल अधिकार भी है | लेकिन एक बात मेरे समझ में नहीं आई कि भारत को अम्मा कहकर उसके आँचल को ही काँट डाला ! ये भी आप सही कह रहे है कि १९४७ में माँ के आँचल को काटने वाले बहुत दूर की सोचते थे और वो जानते थे कि आगे के सालों में भूमण्ड़ली करण का वो दौर आएगा कि आँचल कौन लेकर ही चलेगा भाई अब तो जमाना ही टॉप का है तो फिर आँचल के लये दर्द कैसा ? वैसे हमारे देश में स्वतंत्रता दिवस की बात है तो निराली और हो भी क्यों  ना यहाँ के लोग जो इतने निराले है , इसी लिए तो हम जगद्गुरु कहलाते थे ! यहाँ गर्भ निरोधक तो मुफ्त में बटता है पर जिस झंडे केलिए ना जाने कितनो के सर कलम हो गए वो झंडा आप खरीद कर ही पा सकते है और तो और आपको ये जान कर संतोष होगा कि उसी झंडे को बेच बेच कर ना जाने कितने स्वतंत्र देश के लोगो के घर रोटी बनती है | लेकिन मेरी ये बात सुन कर आपके पेट में खौलन  ना हो तो बात ही अधूरी रह जाएगी क्योकि सर्वोच्च न्यायलय ने इस तरह के झंडे  पर रोक लगा दी है पर स्वतंत्र देश में कानून को मान लिया तो फिर कैसी स्वतंत्रता ? और न विश्वास हो तो चले जाइये चौराहे पर झंडे में डूबा कर्न्तिकारियों का खून २ से १० रुपये में बिक रहा होगा पर आपको इससे क्या क्या क्योकि आप तो इसी से खुश है कि कम से कम अंग्रेज तो इस देश से चले गए और देश में शांति तो आई आप १५ अगस्त को झंडा तो फहरा सके | हमने हमेशा मिल बाँट कर खाने की  शिक्षा पायी है  और भले ही इसके दो चार टुकड़े और हो जाये लेकिन शांति होनी चाहिए क्योकि सबसे बड़ी निधि ही है संतोष ! जब आवें संतोष धन सब धन धूरि सामान ........तो मान गए ना कि संतोषम परम सुखम तो आइये मानते है स्वतंत्रता दिवस .......आरे भैया सुख में ही दुःख है और आज़म दुःख में भी हसि आ जाती है तो अब तो कह दो भारत माता की ........जय .............स्वत्रता दिवस अमर रहे ( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

Sunday, 10 August 2014

काश उसका भाई रावण होता

क्या आप रावण जैसे भाई है ????
मैं जानता हूँ कि रोज हत्या , अपहरण बलात्कार के बीच और यही नहीं लौट आओ तृषा जैसे सीरियल में चचेरी बहन के साथ अननेटिक सम्बन्धो के बीच रेगिस्तान में बून्द जैसा लग रहा होगा आपको आज के दिन भाई -बहन शब्द ऐसे लगे रहा होगा चलो एक दिन तो इस देश में भाई बहन की बात हो रही है !
वैसे एक बात तो है कि जितने नेताओ ने राखी बँधाई  है उनको उन बहनो कि रक्षा के लिए तो साल भर चिंतित रहना ही चाहिए आखिर भाई बने है उनके और उन सभी लड़कियों को भी आज के बाद पूरे साल देखना चाहिए कि इस देश की सड़कों , पर वो कितनी सुरक्षित है ?
वैसे एक बात तो मजेदार है इस देश के इतिहास में और वो ये की इस देश में ना जाने कितने रजवाड़ों ने अपनी बहन बेटी का बेमर्जी से दूसरे राजाओ से विवाह करा के अपने राज्य और अपनी जान को बचाया है तो क्या अब भी बताना पड़ेगा कि बहन बही में कौन किसकी जान और सम्मान की रक्षा कर रहाहै |लीजिये इसी बात पर एक बात और याद आ गयी और वो ये कि रक्षा बंधन जैसे सुरक्षा सूत्र का वर्णन भविष्य पुराण में सबसे पहली बार आया है जब देवासुर संग्राम में इन्द्र की पत्नी शुचि ने पाने पति की युद्ध में रक्षा के लिए ये सूत्र बंधा था तो क्या आप अभी यही समझ रहे है कि बहन भाई की कलाई में राखी बांध कर अपनी रक्षा के लिए दरकार रखती है ? खैर  आपको औरत को दोयम दर्जे रखने की आदत है ! चिल्ला क्यों रहे है क्या आप जैसे भाई होने के कारण ही देश में खुले आम देश में बलात्कार हो रहे है ? क्या आप रावण जैसे भाई है जिसने सिर्फ अपनी जान साम्राज्य इस लिए गवां दिया क्योकि उसकी बहन सुपनखा की नाक काट ली गयी थी | पूरी राम रावण की कहानी का मूल सुपनखा की नाक का काटना और भाई द्वारा अपनी बहन के अपमान का बदला लेना ही तो है | खैर रावण में आप क्यों अच्छाई देखने लगे ये भी कोई भाई हुआ ? भाई का मतलब तो ये की जो लड़की के साथ हर अत्याचार होते हुए देखे और इसी लिए चुप रहे क्योकि बहन के भाग्य में हो दुःख लिखा है तो वो क्या करे ? लड़की को मार जाये तो कोई सच का साथ क्यों दे आखिर कोई वो पहली लड़की तो है नहीं जो मारी गयी | पर आप आज कलाई पर इतनी राखी जरूर बंधवा कर निकालिएगा  जिससे समाज  वाले तो जान ले कि आपके इर्द गिर्द कितनी लड़कियां माफ़ कीजियेगा बहनें है वैसे कोई माने ना माने कितने गरीब दूकान खोल कर राखी बेच कर अपने जीविकोपार्जन कर लेते है और खरीदी चीजो में रिश्ता क्या ढूँढना ? जब राखी ही बाजार की वस्तु हो गयी तो बेचारे भाई भी मजबूर हो गए और बहनो के लिए कुछ भी नहीं कर पाते | क्या आपने बाजार की राखी कलाई में बांधी है ? तब कोई बात नहीं आप चैन की नींद इस देश में सो सकते है क्योकि रिश्ते बाजार में नहीं घर में और दिल में बनते है | क्या मैं रावण बन गया आप जान पाये ?????????

Sunday, 3 August 2014

आप किस तरह के मित्र है ?

मित्र और मित्रता दिवस ...........
आज के दौर में लगता ही नहीं कोई किसी का शत्रु है जिसे देखिये वही सुबह से मित्रता  दिवस की बधाई दिए पड़ा है पर मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप मित्रता किसे कहते है जरा इस पर नज़र डालिये ...........
१- कृष्णा और सुदामा भी मित्र थे और अपने गरीब मित्र सुदामा के लिए कृष्णा ने दो मुट्ठी चावल खा कर उनको दो लोक दे दिए और दोनों मित्र राजसी बैभव में रहने लगे |
२- मित्र तो द्रुपद और द्रोणाचार्य  भी थे लेकिन सिर्फ विधार्थी जीवन तक जब द्रुपद राजा बने और द्रोणाचार्य आचार्य तो जब अपने पुत्र के लिए द्रोण अपने राजा मित्र द्रुपद के पास सहायता लेने पहुंचे तो उनका अपमान हुआ और उन्होंने द्रुपद से इसका बदला भी लिया
३- मित्र कुंती के अविवाहिता होने पर उत्पन्न और बाद में सूत परिवार में पोषित कर्ण और दुर्योधन भी थे जब कुंती कर्ण को बताती है कि पांडव उन्ही के भाई है इस लिए उनका साथ दो तो कर्ण ने मित्रता को प्राथमिकता दी क्योकि मित्र के कान ही वो समझ में ना सिर्फ सम्मान पाये बल्कि राजा भी बने और अंत तक उन्होंने दुर्योधन का ही साथ दिया |
४- मित्र अलाउद्दीन ख़िलजी और रत्न देव भी थे पर जब ख़िलजी से मित्रता के कारण  ही रतनदेव को न सिर्फ अपमानित होना पड़ा बल्कि रानी पद्मनी को जौहर करना पड़ा |
५- अंग्रेज तो जिसके भी मित्र बने उसको बर्बाद करके ही चैन पाये |
६- किसी शायर ने क्या खूब आज की दोस्ती को देख कर लिखा है
दोस्त ही बुनियाद के पत्थर उठा ले जायेंगे ,
इस शहर में मकान बना कर तो देखो |
अब आप खुद ही अपने विश्लेषण को करके देखिये कि जिस मित्रता दिवस को लेकर आप इतना उत्तेजित है उसमे आप कैसे मित्र है क्योकि मैंने तो मित्र बनाना कभी जाना ही नहीं जो आये भी उनके लिए सिर्फ
न जाने लोग क्या क्या भरम पाल लेते है , सांप कि जगह आदमी पाल लेते है |
खीर आप गर चाहते है कि मैं आप पर अपनी बात ना थोपु तो चुकियेगा नहीं बस यूँ ही कहते रहिये मित्र दिवस कि शुभ कामना

Friday, 1 August 2014

पंचमी से पंचनामा तक

पंचमी से पंचनामा तक ...............
आज नाग पंचमी है जिसे गुड़िया भी कहते है | बसंत पंचमी हो या ऋषि पंचमी या नाग  पंचमी , महत्त्व तो सभी का है और हो भी क्यों ना अखित हमारा शरीर भी पांच तत्वों से मिल कर बना है और हाथ में पांच उँगलियाँ भी है अब जब सब पञ्च मय है तो पांच उँगलियों का जादू कैसे पीछे रह जाये ! अक्सर लोग जानना चाहते है कि मनुष्य बन कर क्या फायदा मिला ? वैसे तो आप पृथ्वी के सबसे बुद्धिमान प्राणी है पर नमक मिर्च लगी बाते तो दूसरे से सुनने में ही मजा आता है ! अब देखिये सरे जानवर सीधे खड़े तक नहीं हो पाते एक मनुष्य ही तो है जो सीधे खड़ा हो पाया पर इसका जादू आपको पता है ? नहीं ना ! आरे उसके दोनों हाथ स्वतंत्र हो गए ! यानि इन्ही हाथो के कारण उसने दुनिया ही बदल डाली लेकिन जो कोहिनूर हीरा उसको मिला वो था किसी लड़की का बलात्कार !!!!!!!! है न अच्छी बात इन्ही पांच उँगलियों वाले हाथ से किसी लड़की का दोनों हाथ पकड़ सकते है आपका कोई मित्र लड़की का पैर पकड़ सकता है और एक मुहं दबा सकता है और आप इन्ही दो हाथो के बीच दरंदगी की का शिकार एक लड़की को बना सकते है , है ना मनुष्य के खड़े होकर चलने का मजा ! क्या मजाल जो इतना अद्भुत करतब एक शेर शेरनी के साथ दिखा सके | अब तो समझ गए ना पांच का महत्व पांच तत्व से बने शरीर और पांच उँगलियों का जादू ! पर शायद आप भूल गए की पंचमी तो स्त्री लिंग है और जब तक स्त्रीलिंग को आप अपने शौर्य , से पुल्लिंग में ना बदल दे तो मजा ही क्या और लीजिये जो लड़की आपके पांच तत्वों से तैयार शरीर और पांच उँगलियों के बीच फास कर तड़प रही थी उसने दम तोड़ दिया और आपकी इच्छा हो गयी पूरी पंचमी का अब पंचनामा होगा क्या बात है पहले जिन्दा पर चीरी गयी  अब मर कर चीरी जा रही है पर आपको इन सबसे क्या मतलब पंचमी तो पंचनामा में बदल गयी | आरे आप मेरी बातों में कहा फास गए वो देखिये गुड़िया पीटी जा रही है वहा वहा चौराहे पर आप भी जल्दी से डंडा लेकर जाइये आखिर यही से तो आपको शिक्षा मिलेगी कि घर से लेकर चौराहे तक गुड़िया कैसे पीटी जाती है यही तो है पंचमी का मजा और मजे के बाद सिर्फ पंचनामा ! अब जो बचपन से सीखा वही तो जिंदगी भर निभाएंगे ? देखिये वो एक गुड़िया अकेली जा रही है ? कर दीजिये पंचमी का आज पंचनामा और बन जाइये दो हाथो पर चलने वाले वो जानवर जो इस दुनिया में आपने अपने सिवा किसी को बनने नहीं दिया आखिर जानवर कि क्या औकात जो आदमी बने | पंचमी पर सिर्फ आपका अधिकार है क्योकि पंचनामा तो सिर्फ आदमी ही कर सकता है ( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

Wednesday, 30 July 2014

खुद में मैं रहता हूँ

तन्हाई जब ,
दर्द से मिलती है ,
ये मत पूछो रात भर ,
क्या बात चलती है ,
दीवारों के पीछे कुछ ,
नंगे होते बेशर्म सच ,
साकी सी आँखे ,
बार बार मचलती है ,
शब्दों की खुद की ,
न सुनने की आदत ,
दिल की आवाज बस ,
हर रात ही सुनती है ,
तारों के साथ गुजरी ,
लम्हों में सांसो के बाद ,
सुबह की आहट आलोक ,
क्यों मुझको खलती है ,
अकेले में अकेले का ,
एहसास जब मिलता है ,
जिंदगी क्या बताऊँ ,
तू कैसे संग चलती है