Sunday, 27 July 2014

क्या आप मुष्य है

मौत मेरी हो रही है ,
रोये तुम जा रहे हो ,
दुनिया से जो जा रहा हूँ ,
पहुँचाने तुम आ रहे हो ,
दर्द की इन्तहा पा चुप ,
तुम बिलखते जा रहे हो ,
काश यही हमदर्दी दिखाते ,
तो हम दुनिया से क्यों जाते ,
जिन्दा के लिए वक्त नहीं ,
मरने पर कहा से पाते ,
सच किसे समझूँ आलोक ,
जब जिन्दा था या अब ,
मौत पर हुजूम साथ में है ,
पर अकेला जिन्दा था तब ...............
जानवरों की तरह जीने वालो से निवेदन है कि जब जिन्दा मनुष्य तुमसे सहायता की दरकार करें तो मौश्य की तरह व्यवहार कीजिये ना की जंगल के उन जानवरों के समूहों की तरह जो अपने साथी को शेर द्वारा मारे जाने को देखते रहते है और घास चरते रहते है .क्या कहने के लिए मनुष्य कहते है अपने को ..................क्षमा अगर किसी को बुरा लगे 

Friday, 25 July 2014

क्या यही औरत की पूजा है

१-अनुसूया अगर खाना खिलायेगी तो तभी जब वो खाना नग्न होकर बनाएगी |
२- अगर द्रौपदी कौरवों के ऊपर हस दी तो उसको हस्तिनापुर के राज दरबार में अगर कोई सजा दी जानी  थी तो वो थी उसको भरे दरबार में नग्न करना
३- गार्गी जैसी महिला अगर अपने को विदुषी साबित करना चाहती है तो पुरुष  शासित दरबार में उसको शास्त्रार्थ के नग्न  आने की शर्त
इस देश में देवता वही निवास करते है जहाँ स्त्री की पूजा होती है |\स्त्री की पूजा का मतलब क्या आपको पता है ???

Thursday, 24 July 2014

मनुष्य का जन्म मुश्किल से मिलता है जल्दी कीजिये

ख़बरदार जो मुझे जानवर कहा ..........
तुम मुझे जानवर कह कर व्यंग्य कर रहे हो !! मैं मनुष्य हूँ मनुष्य और मनुष्य का जीवन बड़े पुण्य कर्म करके मिलता है ८४ हज़ार योनियों से गुजरने के बाद तब कही जाकर मानव जीवन मिलता है | भगवन तक तरसते है मानव के रूप में धरती पर आने के लिए | और तुमने मुझको जानवर कहा| माफ़ कीजियेगा मुझसे शायद गलती हो गयी क्योकि मुझे तो आज तक पता था कि मानव को खत्म की राक्षसी आदतो को समाप्त करने के लिए भगवन ने ना जाने कितने जानवरो के अवतार लिए पर आप भी सही कह रहे है भला आप जानवर कैसे हो सकते है | किसी जानवर के समाज में क्या मजाल जो बिना मादा की मर्जी के कोई नर उसको छू भर ले | कितना सम्मान से जीती है गली की कुतिया भी जो रात दिन कही भी कभी भी आ सकती है लेट सकती पर कोई कुत्ता बिना उसकी मर्जी के उसके साथ कुछ नहीं कर सकता खैर आप मनुष्य है और कुतिया शब्द को लेकर आप मुझे बिना जानवर बनाये तो मानेंगे नहीं तो चलिए शेरनी , नागिन किसी का उदहारण ले लीजिये , सब कितनी सुरक्षित है उनकी अस्मिता के साथ शेर , नाग इतनी आसानी से खिलवाड़ नहीं कर सकते ? पर आप तो मानव है जिसने औरत को जब चाहा चाहा अनावृत किया , तेजाब फेका , ब्लैक मेल किया , और तो और शादी का तमगा लगाने के बाद तो पत्नी की इच्छा का कोई मतलब ही नहीं , बस आपकी हर भूख मिटने  के लिए ही तो मानव बने है आप और ऐसे योग तो लाखो साल में कभी कभी आते है और जब आप मानव बने है तो चूकिए नहीं आप जितने अतयाचार अनाचार , हिंसा औरत  के साथ कर सकिये कर डालिये  क्योकि आपके मानव के इसी उच्च कोटि के काम से ही तो ८४ हज़ार योनियों का अस्तित्व बना रहेगा | अब भला आप जानवर कैसे हो सकते है ? औरत को कोठे पर बैठा कर पैसा कमाना, दहेज़ के लिए जला देना , बेच देना , सोशल मीडिया में उसकी फोटो डाल का बदनाम करना भला जानवर क्या करेगा | ये तो दुनिया की सबसे सुन्दरतम कृति और करोडो पुण्य के बाद मिले मानव जीवन से ही उम्मीद की जा सकती है | सच में आप मनुष्य ही है ( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

Wednesday, 23 July 2014

ना ................री

ना .....................री
बचपन से नाग पंचमी के दिन यही देखा कि लड़कियां घर की बुरी आत्माओ को प्रतीक बना कर बहियों के साथ चौराहे तक जाती है और लड़कियां वह उसे डाल देती है जिसे लड़के अपने साथ लए डंडे से पीटते है यानि  घर की बुरी आत्मा सिर्फ लड़की पर सवार होकर ही बाहर जा सकती है अब अगर घर में आई किसी भी समस्या के लिए पुरुष औरतो पर अपना गुस्सा निकालते है या पीट देते है तो ठीक ही तो है आखिर जो सीखा है वही तो करेंगे | खैर आपको मेरी बात ना मानने की आदत है तो चलिए कुछ और सुन लीजिये वर्ष १६०० तक दुनिया में कोई नहीं जनता था की शुक्राणु का मतलब क्या होता है और १६०० में इंग्लॅण्ड के हैम नामक व्यक्ति ने इसकी खोज की पर इस से पहले यूरोपीय देशो में डायन प्रथा जोर पकड़ चुकी थी क्योकि माना जाता था कि जो लड़की अपने शरीर से विपरीत शरीर वाले ( लड़के ) को जन्म दे सकती है उसमे जरूर कोई अद्भुत शक्ति होती है और इसी लिए जब भी कुछ उच्च नीच होती थी तो लड़की को डायन कह कर उसका शोषण होता था | आज भी पूरे विश्व में २५०० महिलाये डायन कह कर मार दी जाती है इस देश में ४२६ मारी जाती है | अब अगर आज लड़कियों कि दुर्दशा हो रही है तो इस में बुराई क्या है ? शरीर उनका , गर्भ उनका और पैदा किया लड़की के बजाये लड़के को | जान जब किसी ने भी अपने घर(गर्भ) में किसी को पैठ दी है तो बेडा गर्क हुआ है क्या आपको अपने देश का हाल नहीं पता , जिसको देखो अतिथि कह कर पहले पनाह दी फिर उसी की गुलामी की | अब जब खुद गर्भ से लड़का पैदा करने का शौक पाला है तो भुगतिये वैसे भी लड़की को लड़की पैदा करना कभी गौरव का विषय लगा ही नहीं और सुना है खरबूजे को देख कर खरबूजा रंग बदलता है यानि दोनों एक जैसे रंग में होते है जब दोनों खरबूजे ( जब लड़की के गर्भ में लड़का हो ) है ही नहीं तो रंग क्या एक जैसा होगा तो लीजिये बदरंग होने का मजा |पूरे पृथ्वी पर पाये जाने वाले हर जीव जंतु में मादा के लिए नर आपस में लड़ाई लड़ते है और मादा को कोई हानि नहीं होती है जो नर जीता मादा उसकी पर हम तो मनुष्य है ना कुछ तो अलग होना चाहिए यहाँ पर पुरुषो को कुछ नहीं होता मारी जाती है सिर्फ और सिर्फ नारी आखिर संस्कृति का ये मजा तो हम सबको मिलना ही चाहिए ! लीजिये प्रोफ़ेसर साहब ने अपनी पत्नी को अपनी माशुका के सामने मार मार कर घर से निकाल दिया पर इसमें परेशान होने वाली क्या बात है आखिर मर्द है इधर उधर मुहं नहीं मारेंगे तो किस बात के मर्द | और इतिहास में तो पत्नियों से ज्यादा प्रेमिकाओं का ही बोलबाला रहा है तो भला कोई क्यों पीछे रहे !पत्नी मार खाए तो खाए काम से काम प्रेमिका बन कर टी वी अखबार में तो छा गयी | वैसे देश पद , पैसा के लिए कब नहीं औरत को बंधुआ मजदुर बनाया गया लेकिन औरत अपने पैरो पर खड़ी तो हो गयी वो तो भला हो चाणक्य का जिन्होंने विष कन्या का चलन चला कर दुनिया को ये तो बता दिया कि औरत कितनी जहरीली हो सकती है अब भला पुरुष ऐसी महिला का मर्दन क्यों ना करें और लीजिये आपके समर्थन में भतृहरि भी आ गए , वो भी औअर्ट के मर्दन के लिए वकालत कर रहे है | क्या इतने उदाहरण काफी नहीं है तो लीजिये कबीर को सुन लीजिये जिस नारी की छाया पड़ने से नाग अँधा हो जाता है , कबीर कहते है उन पुरुषो की क्या कहे जो हमेशा नारी के साथ रहते है अब ऐसे अंधे पुरष क्या जाने कि कि औरत के साथ वो क्या कर रहे है | खैर आप जैसे आधुनिक लोग ऐसी बात सुन कर क्यों गभीर होंगे मत होइए लेकिन सांप आपके सामने निकला नहीं कि सब लाठी लेकर दौड़ पड़े | रात में एक औरत  भी सड़क पर निकल पड़ी क्या हुआ सुबह मारी पायी गयी क्या अब भी बताना शेष है कि बिल से निकली नारी को समाज क्या समझ रहा है | मैंने सोचा किसी नारी से ही पूछते है तो बोली ना ........री  जिसका आरम्भ ही नकारात्मक  है उसके जीवन में सकारत्मक सोचना !!!!!!!!! लेकिन आपने तो औरत कि तारीफ करके ही ??????( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

Tuesday, 22 July 2014

देश प्रगति कर रहा है

देश लगातार विकास कर रहा है .....
जनजाति ......क्या इस शब्द से आप परिचित है ? नहीं तो चलिए मैं आपको बता देता हूँ जनजाति भारत के संविधान के अनुच्छेद ३४२ के अनुसार राष्ट्रपति जी द्वारा घोषित की जाती हैं पर एक विषय है मानव शास्त्र और उसके अनुसार जनजाति एक ऐसा समूह है जिसकी विशेष  वेशभूषा , बोली , व्यव्हार की एक विशेष रीति का पालन करने वाले लोग जो सामन्यतया सभयता या शहरी सस्कृति से दूर रहते है ये प्रकृति के ज्यादा करीब होते है यानि आपकी तरह तो बिलकुल नहीं होते !!!!!!!!!!!!!!!!!! आप सोच रहे होंगे कि मैं यह सब आपको क्यों बता रहा हूँ ? वो इस लिए क्योकि १९५० में जनजातियों की संख्या २१२ थी आउट वर्ष २०११ की सेन्सस के अनुसार इन समूहों कि संख्या बढ़ कर करीब ७०० हो गयी है | १९५० में इनकी कुल जनसँख्या थी करीब तीन करोड़ जो आज बढ़ कर १० करोड़ के आस पास  हो गयी है | उत्तर प्रदेश जहाँ १९५० में एक भी जनजाति नहीं थी वही १९६७ में ५ जनजातीय समूह पैदा हो गए और वर्ष २००२ के बाद बढ़ कर १५ हो गए | अब आपको ये बताने कि क्या जरूरत है कि देश में विकास का मतलब क्या है ? वैसे सरकार ने ये अच्छा तरीका निकला है भूखे प्यासे , और आधुनिकता  से दूर , फटेहाल लोगो को जनजाति कहकर देश में गरीबी हटाने का और बदले में मिलता क्या है संस्कृति पूर्ण विविधता से पूर्ण एक देश | अब तो मान लीजिये कि संस्कृति का जादू और समझ लीजिये कि कैसे हम दुनिया में उन्नति कर रहे है क्या सरकार आपको भी जनजाति घोषित करने जा रही है ? चलो कुछ प्रतिशत और उन्नति का ग्राफ बढ़ गया | जिन लोगो के पास कपडा न हो तो बल्ले बल्ले कह दीजिये ये आदमी जनजाति है और जो कंदमूल जड़ खा कर जिंदगी जी रहे हो कह दीजिये कि ये सांस्कृतिक उद्विकास के अवशेष है सरकार ने इनको विशेष दर्ज दिया है | दवा बनाने वाली विदेशी कंपनी के लिए ऐसी जनजातियों को खोजिए जिनमे चचेरे मौसेरे भाई बहन शादी करते हो आखिर अनुवांशिक रोगो की दवा बनाने के लिए कंपनी प्रयोग किन पर करेंगी ? क्या आप अभी भी यही मानते है कि देश प्रगति नहीं कर रहा है ? आखिर हम जनजाति को १९५० में २१२ समूहों से आज ७०० तक ले आये क्या ये प्रगति नहीं है क्या हमको ऐसी प्रगति पर नाज़ नहीं होना चाहिए ? आखिर इसी प्रगति के लिए ही तो हम सरकार बनाते है ? क्या आप ऐसी प्रगति के लिए संघर्ष कर रहे है ? तो आप धन्य है क्योकि आप देश के लिए ही तो सोच रहे है ? ( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

Monday, 21 July 2014

बलात्कार का दर्शन

यथा राजा तथा प्रजा ..............
बचपन से यही पढ़ते आये कि जैसा राजा वैसी प्रजा , जैसी भूमि वैसा बीज तो क्या जनता बलात्कार इस लिए कर रही है क्योकि राजा ही ???? खैर मेरी क्या औकात जो प्रजा तंत्र में सच कह सकूँ आखिर मुझे जिन्दा रहना है कि नहीं और राजा भी तो अब प्रजातंत्र का ही है | मेरी मानिये तो पूछ कर देखिये राजा से वो कहेंगे कि राजा मुझको बनाया किसने ? जनता ने और जनता ने उसको ही तो राजा बनाया होगा जिसको अपने अनुरूप पाया होगा तो फिर भला इसमें राजा का क्या दोष और वो किसी लड़की के बलात्कार पर क्यों पागल हो ? वैसे तो चाणक्य ने भी कहा है कि राजा को प्रजा की ख़ुशी में ही खुश होना चाहिए और प्रजा के दुःख में दुखी और अब अगर प्रजा लड़की के साथ बलात्कार करके ही खुश है तो भला रजज की कैसे इस कृत्य पर दुखी हो सकता है ? लेकिन आप बार बार राजा को ही क्यों दोष दिलाना चाहते है आखिर आपने भी तो मादा भ्रूण हत्या करके लड़कियों की संख्या घटाई है ! १००० पुरुषो पर ९१४ स्त्रियां यानि ८६ पुरुष स्त्री विहीन यानि ८६ स्त्रियां असुरक्षित लेकिन यह तो सिर्फ एक हज़ार पर है ना  ! एक लाख पर ८६०० और एक करोड़ पर ८६००००( आठ लाख साथ हज़ार स्त्रियां ) और १०० करोड़ पर ८६००००००( ८ करोड़ साथ लाख स्त्रियां ) | क्या अब भी आप कहते है की आप भी दोषी नहीं है रोज करीब नव करोड़ स्त्रियों का जीवन , इज्जत खतरे में रहती है क्योकि मादा भ्रूण हत्या करके हमने ऐसी स्थितियां पैदा कर दी है | लीजिये अब इन साहब को कौन समझाए चिल्ला रहे है कि क्या वही लोग स्त्री का बलात्कार कर रहे है जिनको स्त्री नहीं मिली ? जी जी नहीं मैंने ऐसा कब कहा यह देश तो अनुबह्व को प्राथमिकता देता है तो इस काम में भी अनुभवी लोग न हो ऐसा कैसे हो सकता है ? वैसे नागा जनजाति में एक प्रथा है जिसमे पुरुष महिलाओ के जननांग को तलाल लगा कर रखते है | समाओ जनजाति और नायर लोगो में लड़की कि प्रजनन क्षमता ग्रहण करने पर एक जलूस निकला जाता था कि उपयुक्त पुरुष उसके साथ रह सके पर कितना सुखद है कि अब इन सब का कोई चक्कर ही नहीं जहा भी सन्नाटा देखिये बस देख लीजिये कि बेचारी की क्षमता कितनी है ?वैसे आप ने कभी किसी लड़की की चीख सुनी तो क्या दौड़े या फिर सब कुछ राजा पर ही छोड़ दिया आखिर नियम से चलना आपके खून में है और ये काम तो राजा का है देश में लड़की बचाये आप तो सिर्फ दहेज़ से बचने के लिए लड़की की गर्भ में हत्या कीजिये वैसे आप कानून कभी अपने हाथ में लेते नहीं है वो तो आप इस लिए मादा हत्या करते है आखिर देश की तरक्की के लिए जनसँख्या रोकना जरुरी है कि नहीं , काम से काम इसी बहाने देश सेवा कर लेते है और अगर नहीं कर पाये और लड़की जिन्दा बच कर बड़ी हो गयी तो बलात्कार करके हत्या कर देते है आखिर इन सब में फायदा किस को  हुआ ? देश को ना काम से काम एक प्रजन क्षमता वाली स्त्री खत्म आपने की कि नहीं ? तो ऐसे महापुरुष के लिए राजा क्यों बोले आखिर कोई तो त्यागी है जो चुप चाप नीव के पत्थर की तरह देश की सेवा कर रहा है ? अरे आप रात में कहा चल दिए क्या आज रात आप भी देश की सेवा करने वाले है आखिर राजा का ख्याल जो रखना है प्रजा को >>>( व्यंग्य समझ कर पढ़िए )

Thursday, 17 July 2014

चूहा और आदमी


चूहे की भूल ..........
ग़ुरबत में कोई मुरव्वत नहीं होती है  ,
रोटी की तलाश हर किसी को होती है ,
मैं भी एक रोटी तलाशता  हूँ हर दिन ,
बनाता भी दो अपने लिए  रोज रात ,
पर कमरे का चूहा पूछता है एक बात ,
क्या आज भी मेरा हिस्सा नहीं है ,
मैंने भी तो तुम पर भरोसा किया ,
रात दिन तुम्हारे  इर्द गिर्द जिया ,
कितना खाऊंगा एक टुकड़ा ही तो ,
उसके लिए भी तुमने मुझे जहर दिया ,
आदमी तुम कितने गरीब हो ,
रिश्तो के तो पूरे रकीब हो ,
जब मुझे एक टुकड़ा नहीं खिला सके ,
अपने कमरे में मुझे बसा ना सके ,
तो भला उन मानुस का क्या होगा ,
जो तेरी जिंदगी में यही  कही होगा ,
कितना हिसाब लगाते होगे रोटी का ,
जहर क्या मोल है उसकी भी रोटी का ,
मैं जानता नहीं गर्रीबी क्या होती है ,
चूहा हूँ बताओ आदमियत क्या होती है ..........
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