Wednesday, 19 August 2015

नागिन पंचमी भी तो मनाइये

नागिन पंचमी नहीं मानते हम !!!!!!!!!
दुनिया में सारा खून खराबा तो पुरुषो ( नर ) ने ही किया है वो तो फर्जी हम सब नागिन को ओढ़ देते है कि वो ज्यादा जहरीली होती है ( वैसे नारी के लिए भी भतृहरि ने भी यही कहा है ) अब फर्जी तक्षक ने कुरु के वंशज परीक्षित को काट कर मार क्या डाला कि परीक्षित के पुत्र जनमेजय ने सरे सांपो को मारने का ठेका  ही ले डाला | वो तो भला हो भृह्मा के पुत्र कश्यप की चौथी पत्नी ( औरत ) का जो नागलोक की राजकुमारी थी और कश्यप से उनके एक नाग पुत्र आस्तिक ( अब ये ना पूछियेगा की क्या आदमी और नागिन के सम्बन्ध से कोई बच्चा पैदा हो सकता है कि नही बस  आस्था मान कर अनुवांशिकी का मजा लीये ) और आस्तिक ने जनमेजय को समझाया कि क्यों नागो को बर्बाद कर रहे हो और बस उनके ज्ञान से खुश होकर सांपो को मारने का यज्ञ रोक दिया गया और सिर्फ सांपो का राजा तक्षक बचा गया ( अब ये भी ना पूछियेगा कि बिना नागिन के तक्षक ने फिर इतने साप कैसे पैदा किये और सांपो कि २००० प्रजातियां कहा से आई ) और सांपो के जान की रक्षा आज पंचमी के ही दिन हुई थी इस लिए तब से नाग पंचमी मनाई जाने लगी अब बात रही की क्यों नहीं नागिन पंचमी मनाई जाती है तो मैंने पहले ही कह दिया की सिर्फ तक्षक बचे थे और जब कोई नागिन बची ही नहीं तो भला हम क्यों मनाये नागिन पंचमी ( वैसे दुनिया में नागिन का रूप फिर मिला किसको अब मेरी तो हिम्मत नहीं की मैं कह सकूँ आखिर कौन नागिन के सामने पड़े और उनकी आँखों में बसे पता नहीं कब कहा बदला ले ले मेरे पास तो जनमेजय भी नहीं जो बदला ले सके )  क्या आपको भी लगता है कि आपके पास कोई नागिन जिन्दा है तो पंचमी उसके साथ मनाइये और गाना गाइये तन डोले मेरा मन डोले मेरा ......दिल का गया करार .अब ये ना पूछियेगा कि मैं किसके लिए कह रहा हूँ ? आप सभी को नागिन पंचमी की शुभकामना ( व्यंग्य को समझ कर पढ़े ) आलोक चान्टिया

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