Sunday, 3 August 2014

आप किस तरह के मित्र है ?

मित्र और मित्रता दिवस ...........
आज के दौर में लगता ही नहीं कोई किसी का शत्रु है जिसे देखिये वही सुबह से मित्रता  दिवस की बधाई दिए पड़ा है पर मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि आप मित्रता किसे कहते है जरा इस पर नज़र डालिये ...........
१- कृष्णा और सुदामा भी मित्र थे और अपने गरीब मित्र सुदामा के लिए कृष्णा ने दो मुट्ठी चावल खा कर उनको दो लोक दे दिए और दोनों मित्र राजसी बैभव में रहने लगे |
२- मित्र तो द्रुपद और द्रोणाचार्य  भी थे लेकिन सिर्फ विधार्थी जीवन तक जब द्रुपद राजा बने और द्रोणाचार्य आचार्य तो जब अपने पुत्र के लिए द्रोण अपने राजा मित्र द्रुपद के पास सहायता लेने पहुंचे तो उनका अपमान हुआ और उन्होंने द्रुपद से इसका बदला भी लिया
३- मित्र कुंती के अविवाहिता होने पर उत्पन्न और बाद में सूत परिवार में पोषित कर्ण और दुर्योधन भी थे जब कुंती कर्ण को बताती है कि पांडव उन्ही के भाई है इस लिए उनका साथ दो तो कर्ण ने मित्रता को प्राथमिकता दी क्योकि मित्र के कान ही वो समझ में ना सिर्फ सम्मान पाये बल्कि राजा भी बने और अंत तक उन्होंने दुर्योधन का ही साथ दिया |
४- मित्र अलाउद्दीन ख़िलजी और रत्न देव भी थे पर जब ख़िलजी से मित्रता के कारण  ही रतनदेव को न सिर्फ अपमानित होना पड़ा बल्कि रानी पद्मनी को जौहर करना पड़ा |
५- अंग्रेज तो जिसके भी मित्र बने उसको बर्बाद करके ही चैन पाये |
६- किसी शायर ने क्या खूब आज की दोस्ती को देख कर लिखा है
दोस्त ही बुनियाद के पत्थर उठा ले जायेंगे ,
इस शहर में मकान बना कर तो देखो |
अब आप खुद ही अपने विश्लेषण को करके देखिये कि जिस मित्रता दिवस को लेकर आप इतना उत्तेजित है उसमे आप कैसे मित्र है क्योकि मैंने तो मित्र बनाना कभी जाना ही नहीं जो आये भी उनके लिए सिर्फ
न जाने लोग क्या क्या भरम पाल लेते है , सांप कि जगह आदमी पाल लेते है |
खीर आप गर चाहते है कि मैं आप पर अपनी बात ना थोपु तो चुकियेगा नहीं बस यूँ ही कहते रहिये मित्र दिवस कि शुभ कामना

1 comment:

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