Sunday, 25 January 2015

मरने से पहले गाइये राष्ट्र गान

भला क्यों गए ५२ सेकंड में ........व्यंग्य नहीं
 आज का दिन ऐसा है कि मुझे लगता है मैं कितन कुछ आपसे कह डालूं !!! अच्छा बताइये क्यों राष्ट्र गान ५२ सेकंड में गाते है ???? बताइये बताइये आप तो जगद्गुरु है ज्ञान में बताइये क्यों गाते है ??  नहीं जानते ना तो लिहिये दुनिया के इकलौते अक्लमंद से सुनिए ५२ सेकंड का जादू !!!!!!!!! अपने शरीर के बहने वाले खून को जानते है ना और उसमे जो लाल रक्त कणिकाएं होती है जिससे  पूरे शरीर को  भोजन , ऑक्सीजन  मिलती है वो लाल रक्त कनिका खुले में सिर्फ ५२ सेकंड ही जिन्दा रह सकती है | कुछ समझे की नहीं ?????????? आरे बहिया हम ठहरे गगड गुरु तो हमने अपना राष्ट्र गान ऐसा बनाया कि अगर कोई भारतीय मर भी रहा हो तो जब उसके शरीर की लाल रक्त कनिका ५२ सेकंड में मरे तो कम से कम राष्ट्र गान तो पूरा हो जाये | क्या इतना सम्मान है किसी और देश के पास ( सारा तो बस आप ही के यहाँ है )  तो आज तो बन जाइये सिर्फ भारतीय जिसका रक्त हवा में भी ५२ सेकंड में मरने से पहले राष्ट्र गान ५२ सेकंड में गण जनता है ( है ना मस्त व्यंग्य ) डॉ आलोक चांटिया , अखिल भारतीय अधिकार संगठन

3 comments:

  1. सार्थक प्रस्तुति।
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    आपकी इस प्रविष्टि् की चर्चा कल मंगलवार (27-01-2015) को "जिंदगी के धूप में या छाँह में" चर्चा मंच 1871 पर भी होगी।
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    सूचना देने का उद्देश्य है कि यदि किसी रचनाकार की प्रविष्टि का लिंक किसी स्थान पर लगाया जाये तो उसकी सूचना देना व्यवस्थापक का नैतिक कर्तव्य होता है।
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    गणतन्त्रदिवस की हार्दिक शुभकामनाओं के साथ...
    सादर...!
    डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'

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  2. कुलपति जी झंडारोहण कितने सेकेंड में किये ?

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  3. नई जानकारी, बहुत बढ़िया...

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