Wednesday, 30 January 2013

ham desh na maa ke sath rhte hai

क्या भारत एक देश है ????????????????? बिलकुल नहीं वो तो माँ है ....................जी जी आप बिलकुल सही समझे माँ यानि आंचल में ढूध और आँखों में पानी ........................और ऐसी माँ को आप ही तो कहने से नहीं हिचकते .............जिसके लबो पे बद दुआ  नहीं होती .............वो माँ है जो कभी खफा नहीं होती .....अब आप बताइए .जो देश है ही नहीं और माँ के दर्जे पर है तो वह अपने बेटो के करतूतों पर बद दुआ कैसी दे सकती है .......................आखिर माँ तो डाकू की भी होती है ...तो बलात्कारी के लिए क्यों नहीं ..........................और अगर देश में वह बलात्कारी होता तो कोई भयानक सजा आया कानून कुछ सोचता ..................यहाँ तो माँ की गोद में पला है बलात्कारी .फिर उस देश ?????????????????माँ के बेटे को सजा कैसे और यही नहीं आप सब भी तो इस माँ के बेटे है .अक्सर यह माँ का दर्द रहता है ...............कि अंतहीन रूप से अपने गर्भ से बच्चे ?????????????????बेटे पैदा करने के बाद भी किनारे असुक्षरित रह जाते है ........आखिर बेटे जानते है कि माँ को भी क्या जरूरत है कि अंतहीन रूप से इस दुनिया में माँ बनी बैठी है .उनको भी तो मरना चाहिए .......................ऐसा क्या कि बस जैम कर बैठ गयी देश ?????????????? माँ बन कर और आप ने बिलकुल सही किया उसे वन प्रस्थ का रास्ता  दिखा दिया पर अब तो वह सन्यासिनी जैसी दिखाई देने लगी है ........................पर माँ को अनाथ जैसा छोड़ना आप जैसे कर्मवीरो  को कब सहन हुआ है .इसी  लिए कम से कम चार बेटो ने कन्धा तो दे दिया ................................यही नहीं जो १७ साल ६ महीने  और १२ दिन के भगवान ( भारत में १८ साल से नीचे बच्चा कहलाता है ) ने दिल्ली में बलात्कार करके कौन सा गुनाह कर दिया ???उसने तो सिर्फ अपनी माँ को यही दिखया कि वह नपुंसक नहीं है और न ही माँ बंजर हो गयी है .वह अभी भी उर्वर है और एक से बढ़ कर एक जानवर???????????????? जांबाज पैदा किया है .....आखिर अगर यह देश होता तो उसकी क्या मजाल जो बलात्कार करने के बाद दूसरे दिन का सूरज देखा होता ..पर माँ तो माँ होती है .उसके आँचल में बैठ कर ही हर बच्चा सबसे महफूज होता है ........................क्या आप किसी देश यानि माँ की गोद को तलाश रहे है ...............................कितने भाग्यशाली है हम कि हमने देश नहीं माँ को पाया है .और आप के छाती का अमृत पीकर हमने विष बनाना सीख लिया है .आखिर अमृत का असर और स्थायित्व तभी रहेगा जब उसका एंटी पदार्थ रहे रहे ......................तो क्यों न हम सब माँ के लिए कट मरे .आखिर हमको भी तो माँ सरे सुख देती है .....देखिये एक बस आ रही है ...........................देखिये आप कितने उर्वर है ???????????माँ को जवाब जो देना है .....................क्या आप किसी देश में रहना चाहते है .......................माँ माँ माँ माँ माँ माँ माँ माँ माँ ....................सर कटा सकते है ...पर अब तो तेरे लिए किसी को भी बस में लूट सकते है ...आखिर हम सब है तेरी अद्भुत संतान .........................क्या आप माँ को दिखाना चाहते है ?????????????????????????

1 comment:

  1. प्रभावशाली ,
    जारी रहें।

    शुभकामना !!!

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