Sunday, 17 June 2012

pita , patta aur pta

पिता, पत्ता , पता  यह सभी शब्द कुछ मिलते से लगते है क्योकि भारत में आज पिता की स्थिति पता ही नही है और अगर पता है भी तो वो पता किसी के पास नही जिस पते पर जाकर एक बच्चा उस पिता से मिल ले जिसने उसको जन्म देने में अनुवांशिक भगवन की भूमिका निभाई थी और पिता बनने के ख्वाब को पत्नी के सहरा पूरा करने वाले न जाने कितने पिता को पत्ता बना कर खेल दिया है !!!!! जी हा मै बिलकुल सच कह रहा हूँ पर आपको ताश का पत्ता समझने की आदत सी हो गई है लेकिन मै बसंत के सूखे पत्ते की बात कर रहा हूँ जो चाहे या न चाहे पर दहेज़ निरोधक कानून और घरेलु हिंसा अधिनियम २००५ ने सूखे पत्ते की तरह उसकी नींद उदा रखी है | बस कोई चौदहवी का चाँद बन कर आई नवयुवती उछ दिन बाद यह सोच ले कि इस देश के कानून को पढ़ लिया जाये तो वह झट वह बचपन से संबंधो के जितने नाम जानती होगी उसको पोलिस को बता कर ससुराल में वह कोहराम मचाएगी कि बेचारा पीटीआई , पत्ते की तरह पाना पता ही भूल जायेगा और जिस पते को उसकी पत्नी उसे बताना चाहती है उस पते के कारन न तो कोई शरीफ उसके घर आना पसंद करेगा और न ही पीटीआई महोदय की अगर कोई कुआंरी बहन है तो शादी तो होनी ही नही है ...जी हा मै पते से पति के नए पते यानि जेल की बात कर रहा हूँ झा आज कल के पीटीआई बेचारे ज्यादा ही जाने लगे है क्योकि पत्नी को सावित्री और अनुसूया की कहानी से यही तो शिक्षा मिली है कि कैसे पति के जीवन की रक्षा की जाये और रक्षा तो जेल में ही हो सकती है  मैंने एक विवाहित महिला से जब कहा कि क्या यह आपको अच्छा लगता है आप अपने ससुराल वालो को बिना पैसा या किराया दिए जेल में रखवा रही है टी भारतीय आदर्शो में पली बहु ने कहा कि आपको क्या पता छोटा सा घर है और हर समय सब मेरे ही कमरे में घुसे रहते है , न मै सो पाती हूँ और न सुख पाती हूँ अब सब जेल में है तो कम से कम मै आराम से सोती तो हूँ और फिर कौन पुरे जीवन के लिए जेल चले गए है , इस देश में अफजल गुरु और कसाब तक तो जेल में रहके नही जाते ...कुछ दिन बाद आ जायेंगे छुट के पर आप ये तो देखिये कि बिना पैसे के मैंने ओउटिंग भी करवा दी और मझे आराम भी मिल गया | पर अब आपके ससुराल वाले आपके साथ रहना नही चाहते ??/ तो क्या हुआ .....तलाक लेकर तो दिखाए !!!!!!!! सरकार ने इसा कानून बना दिया है कि औरत न चाहे तो यह मर्द पति पूरी जिन्दगी कोर्ट के चक्कर लगायेंगे और मेरा क्या पिता के घर भी संपत्ति में मेरा हिस्सा और पति को तो सब कुछ  आधा बटाना ही है | महिला सशक्तिकरण के कारन ही  तो हम महिला पुरुष की तरह बद...............हो गए ................पर आपको पिता के लिए संवेदन शील होना चाहिए ....आज पिता दिवस  है आप ने बच्चो को पिता से मिलने क्यों दिया ..............आ रे पिता से क्या मिलने देते उनका सहयोग ही कितना है बच्चो के जन्म में ....जितना सहयोग किया है उतना ही मिलने को कोर्ट ने कहा है तो फिट इस में मेरा क्या दोष आप लोग फर्जी औरत को बदनाम करते है | दो मिनट का कम करते है और १०० घंटे मिलाना चाहते है ....बड़े आये पिता बनने ......पिता दिवस ....बस यही बचा है हम माँ के जीवन में ...जैसे हम खाली बैठे है ........और पिता पत्ते की तरह टूट कर अपना पता बताने लगता है ...........बेचारा पिता ................क्या आप पिता बनने जा रहे है

1 comment:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति!
    आपकी इस प्रविष्टी की चर्चा कल सोमवार (19-06-2012) के चर्चा मंच पर भी होगी!
    सूचनार्थ!

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